- MindsRiot !!!

Breaking

काश तुझ पर भी, लागु होती "RTI"...ऐ जिन्दगी तुझसे, बहुत से जवाब चाहिए..

09 मई 2015

काश तुझ पर यह राज़ खुलता मैं तुझ से क्या चाहता हूँ;
मैं तुझ को नहीं तुझ में कोई मुझ जैसा चाहता हूँ ;

हूँ वाक़िफ़ आईने तेरी सिफ़त से तू सच बोलता है,मगर
मुझको जो बेहतर दिखाए अब ऐसा आइना चाहता हूँ,

सुना है कोई बदनामी मुझ तक आने को है बेक़रार,
मैं भी इन दिनों तनहा सा हूँ थोड़ा हंगामा चाहता हूँ;

पिछले दिनों हम लड़े थे तो और भी क़रीब आ गए थे,
ऐ जान-ए-हयात आओ मैं तुम से झगड़ना चाहता हूँ;

ऐसे तो मुझको पैसे की कोई चाहत नहीं मगर फिर भी,
अब के कुछ तुझको ख़्वाबों के सिवा भी देना चाहता हूँ ;

हर रात कोई दर्द मेरे जिस्म का दरवाज़ा खटखटाता है,
कहता है मैं मुसाफ़िर हूँ रातभर को आसरा चाहता हूँ;

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें